Saturday, June 16, 2018

कैसे कहु की अपना बना लो मुझे

June 16, 2018 0 Comments



कैसे कहु की अपना बना लो मुझे, 
बाहो मे अपने समा लो मुझे। 

दिन  तुम्हारे ऐक पल भी कटता नहीं, 
तुम आकर मुझी से चुरालों मुझे। 

ज़िंदगी तो वो है, जो तुम्हारे संग गुजरी,
दुनिया के गमो से चुरालों मुझे। 

मेरी सबसे गहरी ख्वाइश हो पूरी, 
तुम अगर पास अपने बुलालों मुझे। 

ये कैसा नशा है, जो बहका रहा है,
तुम्हारा हु मै, तो संभालो मुझे। 

न जाने फिर कैसे गुज़रेगी ज़िंदगी,
अगर अपने दिल से कभी तुम निकालो मुझे। 

Monday, June 11, 2018

मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो

June 11, 2018 0 Comments

मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो,
वही मेरे बाबुल का आंगन दीजो,
वही नीम छैयां सा कानन दीजो,
भीगता था जहां प्यारा-सा बचपन,
वही मेरे सपनों का सावन दीजो!!

वही मां ममता की मूरत दीजो,
वही अम्मा की भोली सूरत दीजो,
छुपा लेती थी जो मुझे पलकों में,
वही मां के चरणों का तीरथ दीजो!!

वही बहनों की अठखेलियां दीजो,
वही मेरी सखी सहेलियां दीजो,
बातों की राजेदारी होती थी जिनसे,
वही शक्ल बहना की हूबहू दीजो!!
वही भइया की मुस्कान दीजो,
वही मेरे पीहर का मान दीजो,
डोली में बैठा के जो करे विदा,
उस भैया के कंधों में जान दीजो,

वही मेरा छोटा-सा मकान दीजो,
वही जुगाड़पंती का सामान दीजो,
छोटी-छोटी बातें छोटी-सी खुशियां
वही मेरे शहर का आबोदाना दीजो,

वही मेरे साजन का द्वार दीजो, 
वही सारे सोलह श्रृंगार दीजो,
खुद के वजूद पर इतरा जाऊं,
वही गलबहियों के हार दीजो।

Tuesday, June 5, 2018

हर ऐक हद से गुजर गई माँ

June 05, 2018 0 Comments

हर ऐक हद से गुजर गई माँ,

          बच्चे के लिए बाज़ार मे उतर गयी माँ।

 माँ के पसीने ने घर मे महकाए गुलाब, 

          अपने अरमान खुद ही कुतर गयी माँ।

जब से बहू आई है, वह चुप ही रहती है।

         औलादों का कहना है सुधर गई माँ।

बहू बेटे ने किया था जान लेवा हमला,

         जब पुलिस आयी तब मुकर गयी माँ।

अब केवल यादों मे नज़र आएगी तेरी दुनिया,

         छोड़ के ऊपर गई माँ। 

Sunday, June 3, 2018

तू खुद की खोज मे निकल

June 03, 2018 0 Comments

तू खुद की खोज मे निकल, क्यो तू हताश है।
तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है।

जो तुझसे लिपटी बेड़िया, समझ ना इसको वस्त्र तू,
ये बेड़िया निकाल के, बना ले इसको शस्त्र तू। 

चरित्र जब पवित्र है, तू क्यो है ये दशा तेरी, 
ये पापियो को हक़ नहीं, के ले परीक्षा तेरी। 

तू खुद की खोज मे निकल, क्यो तू हताश है,
तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है।

जला के भस्म कर उसे, जो क्रूरता का जाल है, 
तू आरती की लौ नहीं, तू क्रोध की मशाल है।

चुनार उड़ा के ध्वज बना, गगन भी काप जाएगा, 
अगर तेरी चुनार गिरि, तो ऐक भूकंप आएगा।

तू खुद की खोज मे निकल, क्यो तू हताश है,
तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है।

Wednesday, May 30, 2018

काश ज़िंदगी सचमुच किताब होती

May 30, 2018 2 Comments

काश ज़िंदगी सचमुच किताब होती, 
              पढ़ सकता मै कि आगे क्या होगा, 
क्या पाऊँगा मै और क्या दिल खोयेगा ?
             कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोएगा ? 
काश ज़िंदगी सचमुच किताब होती। 
             फाड़ सकता मै उन लम्हो को,
जिनहोने मुझे रुलाया है, 
             जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी, 
यादों ने मुझे हसाया है। 
            हिसाब तो लगा पाता, 
कितना खोया और कितना पाया है। 
           काश ज़िंदगी सचमुच किताब होती।
वक्त से आंखे चुरा कर, 
          पीछे चला जाता, 
टूटे सपनों को फिर से, 
         अरमानो से सजाता।
कुछ पल के लिए मै भी मुसकुराता। 
         काश ज़िंदगी सचमुच किताब होती। 

लक्ष्य भी है मंजर भी है

May 30, 2018 0 Comments

लक्ष्य भी है , मंजर भी है, 
            चुभता मुश्किलों का खंजर भी है, 
प्यास भी है, आस भी है, 
            ख्वाबो का उलझा एहसास भी है,  
रहता भी है, सहता भी है, 
            बनकर दरिया सा बहता भी है।
पाता भी है, खोता भी है, 
            और लिपट कर रोता भी है,
थकता भी है, चलता भी है, 
            कागज सा दुखो मे गलता भी है,
गिरता भी है, संभलता भी है, 
            सपने फिर नये बुनता भी है। 

Saturday, May 26, 2018

मंज़िल मिल हि जाएगी ऐक दिन

May 26, 2018 0 Comments

मंज़िल मिल हि जाएगी ऐक दिन,

भटकते भटकते हि सही। 

गुमराह तो वो है, 
जो घर से निकले हि नहीं। 

खुशिया मिल हि जाएगी ऐक दिन,
रोते रोते हि सही। 
कमजोर दिल के है वो,
जो हसने की सोचते हि नहीं । 

पूरे होंगे हर वो सपने,
जो देखे है अंधेरी रातो मे । 
ना समझ है वो, 
जो डर से पूरी रात सोते हि नहीं । 


कैसे कहु की अपना बना लो मुझे

कैसे कहु की अपना बना लो मुझे,  बाहो मे अपने समा लो मुझे।  दिन  तुम्हारे ऐक पल भी कटता नहीं,  तुम आकर मुझी से चुरालों मुझे।  ज़िंद...